Drishti Ias : upsc prelims test series 2024 Part 5 free Download

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Drishti Ias : upsc prelims test series 2024 Part 5 free Download

1. निम्नलिखित में से कौन-सा अधिनियम “भारत के शासन को बेहतर बनाने वाले अधिनियम” के रूप में जाना जाता है ?

(a) 1773 का रेग्युलेटिंग एक्ट

(c) 1935 का भारत सरकार अधिनियम

(d) 1947 का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम

व्याख्या –

  •  वर्ष 1858 का भारत सरकार अधिनियम वर्ष 1857 के विद्रोह की ब्रिटिश प्रतिक्रिया थी । ब्रिटिश शासन को एहसास हुआ कि ईस्ट इंडिया कंपनी भारत पर शासन करने के लिये अपर्याप्त है।
  • वर्ष 1858 के अधिनियम को अक्सर भारत के शासन को बेहतर बनाने वाले अधिनियम के रूप में जाना जाता है। यह ब्रिटिश संसद द्वारा पारित एक महत्त्वपूर्ण कानून था जिसने ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान भारत पर शासन करने के तरीके में एक महत्त्वपूर्ण बदलाव को चिह्नित किया।
  • वर्ष 1858 के अधिनियम ने भारत का शासन अधिकार ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी से ब्रिटिश ताज को हस्तांतरित कर दिया। इसने भारत में प्रत्यक्ष ब्रिटिश शासन की शुरुआत को चिह्नित किया, जो वर्ष 1947 में भारत को स्वतंत्रता मिलने तक जारी रहा।
  • इस अधिनियम के कारण भारत के लिये एक राज्य सचिव की नियुक्ति की गई, जो ब्रिटिश सरकार का सदस्य था और देश का प्रशासन करने के लिये भारतीय सिविल सेवाओं की स्थापना हुई।
  • भारत का गवर्नर जनरल, जो पहले ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रतिनिधित्व करता था, अब भारत के वायसराय के रूप में नामित किया गया और भारत में ब्रिटिश क्राउन का प्रतिनिधि बन गया। वायसराय के पास महत्त्वपूर्ण कार्यकारी अधिकार थे। अतः विकल्प (b) सही है।

2. भारत की संविधान सभा में देसी रियासतों के प्रतिनिधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये :

1. उनका चुनाव देसी रियासतों के प्रमुखों द्वारा किया जाना था।

2. उन्हें देसी रियासतों के प्रमुखों द्वारा नामांकित किया जाना था।

3. उन्हें देसी रियासतों की जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुना जाना था।

4. देसी रियासतों का संविधान सभा में कोई अलग प्रतिनिधित्व नहीं था।

उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं ?

(c) केवल तीन

(d) सभी चार

व्याख्या –

  • संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या 389 थी, जिसमें से 93 सीटें देसी रियासतों को आवंटित की गई थीं। प्रत्येक देसी रियासतों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें आवंटित की जानी थीं। अतः कथन (4) सही नहीं है । ।
  • देसी रियासतों के प्रतिनिधि को उनके प्रमुखों द्वारा नामित किया जाना था। रियासतों के प्रमुख, शासक, अपने-अपने राज्यों के प्रतिनिधियों को संविधान सभा में नामांकित करने के लिये ज़िम्मेदार थे। अतः कथन (1) सही नहीं है किंतु कथन (2) सही है।
  • ये नामांकित व्यक्ति आमतौर पर ऐसे व्यक्ति होते थे जिन पर शासक विश्वास करते थे और वे विधानसभा में अपने राज्य के हितों एवं चिंताओं का प्रभावी ढंग से प्रतिनिधित्व कर सकते थे। देसी रियासतों ने संविधान सभा में अपने प्रतिनिधि चुनने के लिये प्रत्यक्ष चुनाव नहीं कराया । अतः कथन (3) सही नहीं है।
  • इन प्रतिनिधियों ने संवैधानिक चर्चाओं और भारतीय संविधान के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि संविधान निर्माण प्रक्रिया के दौरान देसी रियासतों के हितों और चिंताओं पर विचार किया गया।

3. निम्न पर विचार कीजिये :

1. उच्च सदन का विघटन

2. विधित एवं वास्तविक कार्यकारी की उपस्थिति

3. संसद के प्रति कार्यपालिका का सामूहिक उत्तरदायित्व

4. शक्तियों का सुस्पष्ट पृथक्करण

उपर्युक्त में से कितनी भारतीय संसदीय शासन प्रणाली की विशेषताएँ हैं?

(b) केवल दो

(c) केवल तीन

(d) सभी चार

व्याख्या –

  • उच्च सदन का विघटनः भारत में राज्यसभा ( उच्च सदन) एक स्थायी सदन है जो भंग नहीं होता है। लोकसभा (निम्न सदन) ऐसा सदन है जो विघटन और पुनः चुनाव से गुजरता है,
  • राज्यसभा एक सतत् निकाय है। राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल अलग-अलग होता है, एक-तिहाई सदस्य प्रति दो वर्ष में सेवानिवृत्त हो जाते हैं।
  • विधित और वास्तविक कार्यकारी की उपस्थिति: भारत का राष्ट्रपति विधित तौर पर कार्यकारी है, जो बड़े पैमाने पर औपचारिक भूमिका निभाता है और संविधान के अनुसार कार्य करता है। वास्तविक तौर पर कार्यकारी प्रधानमंत्री है, जो वास्तविक कार्यकारी शक्तियों का प्रयोग करता है ।
  • कार्यपालिका का संसद के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्वः भारतीय संसदीय प्रणाली में सामूहिक उत्तरदायित्व अनुच्छेद 75 के तहत केवल लोकसभा ( संसद के निम्न सदन) पर लागू होता है, न कि संपूर्ण संसद पर ।
  • शक्तियों का सुस्पष्ट पृथक्करण: भारत में संसदीय प्रणाली में राष्ट्रपति प्रणाली की तरह शक्तियों का सुस्पष्ट पृथक्करण नहीं है। इसमें शक्तियों का मिश्रण है जहाँ कार्यपालिका विधायिका का ही हिस्सा है और विधायिका के ही प्रति उत्तरदायी है।

भारत की संसदीय प्रणाली की प्रमुख विशेषताएँ :

• कार्यकारी और विधायी शाखाओं का मिश्रण।

• सरकार का प्रमुख, प्रधानमंत्री, लोकसभा में बहुमत दल से ।

• द्विसदनीय संसद (राज्यसभा और लोकसभा) ।

• कार्यपालिका की लोकसभा के प्रति प्रत्यक्ष जवाबदेही ।

• कोई निश्चित सरकारी कार्यकाल नहीं; विधायी विश्वास पर निर्भर करता है।

• संसदीय जाँच के लिये प्रश्नकाल ।

• निम्न सदन का विघटन। अतः विकल्प (a) सही है।

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अंतिम शब्द

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