NCERT Indian History Notes Pdf ( 4 ) : भारत छोड़ो आन्दोलन

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भारतीय इतिहास एक ऐसा विषय है जो लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है अगर आप यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो हम आपके लिए Ncert Class 11 History Book Notes उपलब्ध करवा रहे हैं  यह नोट्स कक्षा 6 से 12 पर आधारित है इसलिए इस पोस्ट में हमने आपके लिए NCERT Indian History Notes Pdf ( 4 ) : भारत छोड़ो आन्दोलन के नोट्स नीचे उपलब्ध करवा दिए हैं

उम्मीद करता हूं इन नोट्स को पढ़कर आपका Quit India Movement टॉपिक अच्छे से क्लियर हो जाएगा क्योंकि हम आपके लिए बेहतरीन से बेहतरीन नोट्स उपलब्ध करवाने की कोशिश करते हैं

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NCERT Indian History Notes Pdf ( 4 ) : भारत छोड़ो आन्दोलन

भारत छोड़ो आंदोलन (9 अगस्त, 1942)

●  प्रारम्भ- 9 अगस्त, 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन प्रारम्भ हुआ।

●  इसको ‘अगस्त क्रांति’ के नाम से जाना जाता है।

●  भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक ऐसा जन आंदोलन था जिसने ब्रिटिश सरकार की जड़ें हिला कर रख दी।

●  मार्च, 1942 के क्रिप्स मिशन की असफलता ने भारतीय जनता को निराश किया।

●  द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान कीमतों में वृद्धि एवं आवश्यक वस्तुओं की कमी के कारण भारतीय जनता में असंतोष की भावना बढ़ गई थी। ब्रिटेन द्वितीय विश्वयुद्ध में मलाया, सिंगापुर और बर्मा में पीछे हट रहा था। जापान ने इन पर अधिकार कर लिया था।

●  ऐसे समय में महात्मा गाँधी ने अपने पत्र ‘हरिजन’ में अंग्रेजों से भारत छोड़ने की बात करते हुए लिखा कि भारत में अंग्रेजों की उपस्थिति जापानियों को भारत पर आक्रमण करने का निमंत्रण है।

●  गाँधी ने अंग्रेजों से भारत को ईश्वर के हाथों में अथवा अराजकता में छोड़ने की बात कही। गाँधी ने ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध अहिंसक आंदोलन आरंभ करने का निश्चय किया।

●  अबुल कलाम आजाद एवं जवाहर लाल नेहरू इसके पक्ष में नहीं थे। उन्हें महात्मा गाँधी की यह योजना अव्यावहारिक लग रही थी।

●  गाँधीजी ने कांग्रेस को अपने प्रस्ताव को स्वीकार न किए जाने की स्थिति में चुनौती देते हुए कहा कि ‘मैं देश की बालू से ही कांग्रेस से भी बड़ा आन्दोलन खड़ा कर दूँगा।’

●    वर्धा प्रस्ताव– 14 जुलाई, 1942 को कांग्रेस कार्यसमिति ने ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो प्रस्ताव’ पारित किया।

   आन्दोलन  का प्रारम्भ

●  7 अगस्त, 1942 को बम्बई में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक में एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया।

   8 अगस्त, 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन का प्रस्ताव पास किया गया।

●  8 अगस्त 1942 को बंबई के ग्वालिया टैंक में एक ऐतिहासिक सभा में महात्मा गाँधी ने ‘करो या मरो’ का नारा दिया।

●  9 अगस्त को तड़के ‘ऑपरेशन जीरो ऑवर’ के तहत कांग्रेस के सभी बड़े नेता गिरफ्तार कर लिए गए।

●  गाँधीजी व सरोजिनी नायडू को पूना के आगा खाँ महल में व अन्य नेताओं को अहमदनगर के किले में रखा गया और कांग्रेस को अवैधानिक संस्था घोषित कर दिया गया।

●   स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान यह पहला ऐसा आन्दोलन था जो नेतृत्व विहीन होने के बावजूद उत्कर्ष तक पहुँचा।

●  राष्ट्रीय नेताओं की गिरफ्तारी से जनआक्रोश फैल गया।

●   देश में बंबई, अहमदाबाद, पूना, दिल्ली, कानपुर, इलाहाबाद, पटना आदि प्रमुख शहरों में बड़े-बड़े जुलूस निकाले गए। स्कूल, कॉलेज एवं कारखानों में हड़तालें की गई। स्थान-स्थान पर स्वतःस्फूर्त आंदोलन होने लगे।

●  ब्रिटिश दमन चक्र से आक्रोशित जनता हिंसात्मक कार्यवाहियों में लिप्त हो गई।

●  भीड़ ने ब्रिटिश सत्ता के प्रतीकों पुलिस थाने, डाकघर,न्यायालय, रेलवे स्टेशन आदि स्थानों पर आक्रमण किया।

●  सार्वजनिक भवनों पर तिरंगा फहराया जाने लगा।

●  रेल की पटरियाँ उखाड़ने, पुल उड़ा देने एवं टेलीफोन व तार की लाइनें काट देने का सिलसिला चलता रहा।

●  सरकारी अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों एवं मुखबिरों पर हमले हुए।

●  समाजवादी अच्युत पटवर्धन, जयप्रकाश नारायण, डॉ.राममनोहर लोहिया, श्रीमति अरूणा आसफ अली ने भूमिगत होकर इस आंदोलन में योगदान दिया।

●  सुमति मोरारजी ने अच्युत पटवर्धन के लिए प्रतिदिन एक नई कार की व्यवस्था की और गिरफ्तार होने से बचाया।

●  राम मनोहर लोहिया कांग्रेस रेडियो पर बोलते रहे।

●  अरूणा आसफ अली बंबई में सक्रिय रही। उन्होंने ग्वालिया टैंक मैदान में तिरंगा फहराया।

●   भारत छोड़ो का नारा युसूफ मेहर अली ने दिया था।

   आन्दोलन के दौरान स्थापित समानान्तर सरकारों (प्रति सरकार) –

●   सतारा, बलिया एवं मिदनापुर में भारत छोड़ो आंदोलन के समय समानांतर सरकार स्थापित की गई थी।

स्थाननेताअवधि
बलिया(उत्तर प्रदेश)चित्तू पांडेएक सप्ताह (अगस्त, 1942)
मिदनापुर (बंगाल)सतीश सामंत17 दिसंबर,1942 – सितंबर, 1944 तक
सतारा(महाराष्ट्र)नाना  पाटिलसबसे लम्बे समय तक (वर्ष 1945 तक)

●  10 फरवरी, 1943 में गाँधी ने जेल में उपवास आरंभ कर दिया। अंग्रेज सरकार गाँधीजी पर दबाव डाल रही थी कि वे भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान हुई हिंसात्मक गतिविधियों की भर्त्सना करें।

●  गाँधी का मानना था कि आंदोलन के हिंसक रूप के लिए ब्रिटिश सरकार उत्तरदायी थी।

●  गाँधी की रिहाई की माँग उठने लगी।

●  वायसराय की कार्यकारिणी परिषद् के तीन सदस्य एम. एस. एनी. एन.आर. सरकार एवं एच. पी. मोदी ने इस्तीफा दे दिया।

●   एक तरफ भारतीय जनता के विभिन्न वर्ग गाँधीजी को रिहा करने की माँग कर रहे थे तो दूसरी ओर ब्रिटिश सरकार गाँधी के अंतिम संस्कार की तैयारियाँ कर रही थी। गाँधीजी को बीमारी के आधार पर 6 मई, 1944 को रिहा कर दिया गया।

  वर्ष 1942 के अन्त तक 60 हजार से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका था। पुलिस एवं सेना की गोलीबारी में 10,000 से भी अधिक लोग मारे गए।

●  मुस्लिम लीग ने इस आंदोलन में निरपेक्षता की नीति अपनाई। मुस्लिम लीग के मुहम्मद अली जिन्ना ने मुसलमानों से अपील की कि वे इस आंदोलन से बिल्कुल अलग रहें। जब कांग्रेस के प्रमुख नेता जेल में थे तब जिन्ना ने मुस्लिम लीग को 23 मार्च, 1943 को पाकिस्तान दिवस मनाने को कहा।

●  साम्यवादियों ने कांग्रेस से भारत छोड़ो आंदोलन वापस लेने को कहा।

●  कम्युनिस्ट पार्टी ने अंग्रेज सरकार का सहयोग किया।

●  नेतृत्व विहीन यह आंदोलन भारतीय जनता के संघर्ष एवं बलिदान का अनूठा उदाहरण है।

●  युवाओं, महिलाओं, किसानों आदि विभिन्न वर्गों ने बड़ी वीरता से इस आंदोलन में भाग लिया और यातनाएँ सहन की।

●  अरूणा आसफ अली एवं सुचेता कृपलानी जैसी महिलाओं ने भूमिगत होकर कार्य किया।

●  उषा मेहता कांग्रेस रेडियो चलाने वाले समूह की सदस्या थी।

●  मजदूर वर्ग की भूमिका इस आंदोलन में सक्रिय थी।

●   भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान होने वाले कार्यों की रूपरेखा हरिजन पत्रिका में “के.जी.” मशरुवाला ने तैयार की।

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