Ncert Physics ( भौतिक विज्ञान ) Notes in Hindi : गति के नियम

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विज्ञान एक ऐसा विषय है जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इनमें साइंस से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे जाते हैं लेकिन जब तक आप अच्छे स्टडी मैटेरियल से तैयारी नहीं करते तब तक सफलता पाना मुश्किल है इसलिए हम आपको इस पोस्ट में Ncert Physics ( भौतिक विज्ञान ) Notes in Hindi : गति के नियम और समीकरण Part 2 के संपूर्ण नोट्स उपलब्ध करवा रहे हैं

यह Ncert Class 11th Physics Chapter 5 पढ़ने के बाद आपको इकाई एवं मापन टॉपिक अच्छे से क्लियर हो जाएगा आपको इस टॉपिक को तैयार करने के लिए अन्य जगह से पढ़ने की आवश्यकता नहीं होगी

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Ncert Physics ( भौतिक विज्ञान ) Notes in Hindi : गति के नियम Part 1

Ncert Physics ( भौतिक विज्ञान ) Notes in Hindi : गति के नियम

II.  गति का द्वितीय नियम

–  इस नियम के अनुसार वस्तु पर आरोपित बल उसके संवेग में परिवर्तन की दर के बराबर होता है अर्थात् कोई वस्तु किसी बल के प्रभाव में गति करे तो वस्तु पर आरोपित बल उसके द्रव्यमान एवं त्वरण के गुणनफल के बराबर होता है।

–  न्यूटन के द्वितीय नियमानुसार –

बल (F) ∝ संवेग परिवर्तन की दर

�=����(∵�=��)�=�(�×�)���=��

–  न्यूटन के गति के द्वितीय नियम के कुछ व्यावहारिक उदाहरण-

1.   क्रिकेट में बॉल को कैच करते समय खिलाड़ी द्वारा अपने हाथों को बॉल की गति की दिशा में पीछे ले जाना।

2.   ठोस धरातल की तुलना में रेत में गिरने पर कम चोट का अनुभव होना।

III.  गति का तृतीय नियम

–  इस नियम के अनुसार प्रत्येक क्रिया की विपरीत दिशा में उतने ही परिमाण की विपरीत प्रतिक्रिया भी होती है।

–  गति के तृतीय नियम के व्यावहारिक उदाहरण-

1.   रॉकेट प्रक्षेपण के समय तेज गति से गैसें बाहर निकलने पर रॉकेट पर विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया बल लगने से रॉकेट ऊपर की ओर गति करता है।

2.   पृथ्वी पर चलते समय हम पृथ्वी को पैरों से पीछे धकेलने की कोशिश करते हैं लेकिन पृथ्वी द्वारा लगाए गए प्रतिक्रिया बल से हम आगे की ओर बढ़ पाते हैं।

3.   एक तैराक अपने हाथों द्वारा पानी को पीछे की ओर धकेलता है, जिससे वह तैराक पानी में आसानी से तैरने लगता है।

गति के समीकरण

–  जब कोई वस्तु सीधी रेखा में एक समान त्वरण से चलती है, तो एक निश्चित समयान्तराल में समीकरणों के द्वारा उसके वेग, गति के दौरान त्वरण व उसके द्वारा तय की गई दूरी के संबंध को गति के समीकरणों द्वारा स्पष्ट किया जाता है।

1. V=u+at

2. S=ut+ 12 at2

3. V2 = u2+2as

–  पारिभाषिक शब्दावली-

u= प्रारंभिक वेग

V= अंतिम वेग

t = समय

S = विस्थापन

a = त्वरण

गति के प्रकार:-

एक विमीय गति (One Dimensional Motion)

–  जब वस्तु किसी एक ही अक्ष (Axis) में गति कर पाए तो ऐसी गति एक विमीय गति कहलाती है।

उदाहरण:–

–  पतले धागे पर चींटी की गति।

–  पतली एवं सीधी सड़क पर कार की गति।

–  लिफ़्ट की गति।

–  स्वतंत्र रूप से गिरती हुई भारी वस्तु की गति।

द्वि-विमीय गति (Two Dimensional Motion)

–  जब वस्तु की गति दो अक्षों के अनुदिश हो तो वस्तु की गति द्वि-विमीय कहलाती है।

उदाहरण:–

–  घुमावदार (Curved) सड़क पर वाहन की गति।

–  प्रक्षेप्य गति (Projectile Motion)

–  तोप से बंदूक से गोला या गोली की गति।

–  भाला फेंक एवं गोला फेंक में इनकी गति।

–  झूले की गति (Marry-go-Round)

त्रि-विमीय गति (Three Dimensional Motion)

–  जब किसी वस्तु की गति तीनों अक्षों (X, Y व Z) के अनुदिश हो तो इसे त्रि-विमीय गति कहते हैं।

उदाहरण:–

–  उड़ते हुए पक्षी या कीट (Insect) की गति।

–  आकाश में उड़ते वायुयान की गति।

–  पतंग (Kite) की गति।

–  गैसीय अणुओं की गति

सरल रेखीय गति (Linear Motion)

–  सरल रेखीय गति में वस्तु एक सीधी रेखा (Straight Line) के अनुदिश गति करती है।

उदाहरण:–

–  सीधी सड़क पर कार की गति, मुक्त रूप से गिरती वस्तु।

–  सरल गति के दौरान वस्तु पर उसकी गति की दिशा में या गति की दिशा के विपरीत बल लगता है।

–  सरल रेखीय एक विमीय गति का ही उदाहरण है।

वृत्तीय गति (Circular Motion)

–  जब वस्तु की गति के दौरान उस पर लगने वाला बल उसके वेग (Velocity) की दिशा के लंबवत् (Perpendicular) हो तो उसकी गति वृत्तीय गति (Circular Motion) होती है।

–  वृत्ताकार पथ पर गति करती हुई वस्तु पर अभिकेंद्रीय बल (Centripetal Force) लगता है, जिसकी दिशा इस वृत्ताकार पथ के केन्द्र की ओर होती है।

आवर्त गति (Periodic Motion)

–  जब कोई वस्तु अपनी गति के दौरान अपने पथ (Path) को निश्चित समय के बाद दोहराती है तो वस्तु की गति आवर्त गति कहलाती हैं।

उदाहरण:–

–  सूर्य के चारों ओर ग्रहों की गति।

–  वृत्तीय पथ पर नियत चाल से गति करते हुए कण।

–  घड़ी की घण्टे वाली सूई का घूर्णन

सरल आवर्त गति (Simple Harmonic Motion)

–  जब कोई वस्तु किसी माध्य अवस्था (Mean Position) के आस-पास गति करते हुए निश्चित समय अंतराल में अपने पथ को दोहराती है तो ऐसी गति सरल आवर्त गति S.H.M. कहलाती है।

उदाहरण:–

–  घड़ी के पैण्डूलम की गति।

–  ‘U’ आकार की नली में भरे हुए जल की गति।

–  झूले की गति।

SHM करते पेंडूलम का आवर्तकाल:-

सरल आवर्त गति के घटक:-

(i)  आयाम (Amplitude) – S.H.M. करते कण/पेंडूलम का अपनी माध्य अवस्था (Equilibrium) से अधिकतम विस्थापन (Displacement) उसका आयाम कहलाता है।

(ii)  आवर्तकाल (Time-period) – S.H.M. करते कण/पेंडूलम को एक चक्कर/दोलन पूरा करने में लगा समय आवर्तकाल कहलाता है।

आवृत्ति (Frequency)

–  प्रति सेकण्ड लगाए गए दोलन/चक्करों की संख्या SHM करती वस्तु की आवृत्ति कहलाती है तथा ये आवर्तकाल का व्युत्क्रम () होती है।

आवृत्ति (n) =

–  आवृत्ति (n) का गुना वस्तु की कोणीय आवृत्ति (w) कहलाती है अर्थात्

कोणीय आवृत्ति (w) = =

जड़त्व आघूर्ण (I)

–  जिस प्रकार रेखीय गति में द्रव्यमान होता है उसी प्रकार घूर्णन गति में जड़त्व आघूर्ण होता है।

I = m × r2

मात्रक = Kg × mtr2

विमा = M1L2T0

बल आघूर्ण ():-

–  घूर्णन गति करते पिण्ड पर आरोपित बल (F) तथा घूर्णन अक्ष से उस वस्तु की लम्बवत् दूरी का गुणनफल बल आघूर्ण कहलाता है।

मात्रक – न्यूटन × मीटर

विमा – M1L2T-2

महत्त्वपूर्ण तथ्य

I.   यदि वस्तु विरामावस्था से गति करना प्रारंभ करती है, तो u=0 होगा।

II.   ब्रेक लगाने/टक्कर के बाद वस्तु रुक जाती है, तो V=0 होगा।

III.   ऊर्ध्वाधर दिशा में गति के समय त्वरण गुरुत्वीय त्वरण (g) होता है।

IV.   यदि वस्तु ऊपर की ओर गति करे तो गुरुत्वीय त्वरण ऋणात्मक (-ve) होगा।

V.   यदि वस्तु नीचे की ओर गति करे तो गुरुत्वीय त्वरण धनात्मक (+ve) होगा।

नोट:-  रॉकेट प्रक्षेपण रेखीय संवेग संरक्षण पर तथा न्यूटन के गति के तीसरे नियम पर आधारित होता है।

द्रव्यमान v/s भार

–  द्रव्यमान तो वस्तु में उपस्थित द्रव्य या पदार्थ की मात्रा है, जबकि भार उस वस्तु पर पृथ्वी द्वारा लगाया गया बल है।

–  द्रव्यमान एक अदिश राशि है।

–  भार एक सदिश राशि है।

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अंतिम शब्द

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