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Rajasthan Gk Notes in Hindi आज की इस पोस्ट में हम आपके लिए राजस्थान के एक महत्वपूर्ण  टॉपिक के क्लास नोट्स उपलब्ध करवा रहे हैं राजस्थान की प्रमुख लोकदेवियाँ ( 1 ) | Rajasthan General Knowledge Best Notes अगर आप राजस्थान कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो राजस्थान की लोक देविया के बारे में आपको जरूर पढ़ने को मिलेगा उसी से संबंधित आज की यह पोस्ट है जिसमें आपको कंप्लीट शॉर्ट नोट्स पढ़ने को मिलेंगे जिससे यह टॉपिक आपको अच्छे से क्लियर हो जाएगा ऐसे नोट्स शायद ही आपको कहीं अन्य प्लेटफार्म पर देखने को मिलेंगे

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राजस्थान की प्रमुख लोकदेवियाँ ( 1 ) | Rajasthan General Knowledge Best Notes

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करणी माता (चूहों वाली देवी)

  • – जन्म – 1387 ई. (वि.सं.1444)
  • – जन्म स्थान – सुआप गाँव, जोधपुर
  • – पिता- मेहाजी चारण
  • – माता- देवल 
  • – बचपन का नाम- रिद्धु बाई या रिद्धि बाई
  • – करणीमाता का विवाह देशनोक (बीकानेर) निवासी देपाजी बीठू के साथ हुआ ।
  • – कुलदेवी – चारण जाति  
  • – आराध्य देवी  – बीकानेर के राठौड़ वंश
  • – प्रमुख मंदिर  – देशनोक 
  • – मेला – चैत्र एवं आश्विन नवरात्र
  • – करणी माता की आराध्य देवी –  तेमड़ाराय माता 
  • – प्रतीक –  चील
  • – इस मंदिर को चूहों वाला मंदिर कहते हैं और इन चूहों को काबा कहते हैं।
  • – करणी माता ने 12 मई, 1459 को मेहरानगढ़ दुर्ग की नींव अपने हाथों से रखी।
  • – बीकानेर राज्य की स्थापना भी करणी माता के आशीर्वाद से की गई।
  • – करणी माता का प्रारंभिक पूजा स्थल बीकानेर में नेहड़ी कहलाता है, जो जाल वृक्ष के नीचे स्थित है।
  • –  करणी माता के मंदिर को मठ कहा जाता है।
  • – महाराजा गंगा सिंह ने करणी माता के मंदिर में चाँदी के किवाड़ चढ़वाए थे।
  • – लगभग 151 वर्ष की आयु में करणी माता ने वि.सं. 1595 (1538 ई.) में धिनेरू की तलाई नामक स्थान दियात्रा गाँव (बीकानेर) में अपने प्राणों का त्याग किया।

तनोट माता

  • – उपनाम – थार की वैष्णो देवी, सैनिकों की देवी, रूमाली माता 
  • – प्रमुख स्थल – तनोट, जैसलमेर 
  • – निर्माण –  भाटी शासक तणुराव   
  • – आराध्य देवी  – भाटी शासकों एवं भारतीय सैनिकों की।
  • – इनका पुजारी सीमा सुरक्षा बल का जवान होता है।
  • – तनोट माता मंदिर के सामने भारत-पाक युद्ध  वर्ष 1965 में भारत की विजय का प्रतीक ‘विजय स्तम्भ’ स्थापित है। 

जीण माता (दुर्गा का अवतार)

  • – जन्म- घांघू गाँव, चूरू 
  • – बचपन का नाम – जयन्ती या जैवण बाई
  • – भाई – हर्ष (भैरव का रूप)
  • – अन्य नाम – जयंती देवी (पुराणों में), भ्रामरी देवी (भूरी की राणी)।
  • – प्रमुख स्थल – रैवासा, सीकर, 
  • – हर्ष पर्वत पर स्थित शिलालेख के अनुसार जीण माता मंदिर का निर्माण पृथ्वीराज चौहान प्रथम के शासन काल में हट्टड़ ने 1064 ई. (वि.सं. 1121) में करवाया।
  • – उनके मंदिर में औरंगजेब ने छत्र भेंट किया था।
  • – कुलदेवी  – चौहान वंश 
  • – मेला – प्रतिवर्ष चैत्र और आश्विन माह के नवरात्र 
  • – आराध्य देवी – मीणा जनजाति 
  • – इनके मंदिर के पास उनके भाई हर्षनाथ का मंदिर बना हुआ है जिसका निर्माण गुवक चौहान ने करवाया।
  • – इस मंदिर के पास ‘जोगी तालाब’ स्थित है, जहाँ पर पाण्डवों की आदमकद प्रतिमा है।
  • – राजस्थान के लोक साहित्य में जीण माता का गीत सबसे लम्बा लोकगीत है जो ‘कनफटे जोगी’ द्वारा गाए जाते हैं।
  • – ढाई प्याले शराब चढ़ाई जाती थी जिस पर अभी प्रतिबन्ध है। 
  • – यहाँ वर्ष 2003 में इन पर ‘जय जीण’ नाम से फिल्म बनी थी।

आई माता

  • – जन्म स्थान- मालवा
  • – पिता – भीखा डाबी
  • – बचपन का नाम – जीजी बाई
  • – माण्डू सुल्तान से विवाह के डर से जोधपुर आई।
  • – कुलदेवी – सिरवी जाति 
  • – शिष्या – रामदेव जी
  • – मंदिर – बिलाड़ा, जोधपुर 
  • – 11 डोरा पंथी  – आई पंथी, आई माता द्वारा बनाए गए 11 नियमों का पालन करते हैं। 
  • – इनके मंदिर में गुर्जर जाति के लोग प्रवेश नहीं करते हैं।
  • – इनके मंदिर में अखण्ड ज्योत  से केसर टपकती है।
  • – इनके थान को बडेर कहते हैं, इसमें मूर्ति नहीं होती। 
  • – इनके मंदिर को सिरवी जाति के लोग दरगाह कहते हैं।

शीतला माता

  • – मुख्य मंदिर – शील की डूँगरी, चाकसू (जयपुर)
  • – प्रतीक चिह्न – जलता हुआ दीपक या मिट्टी का बर्तन
  • – उपनाम – महामाई, बच्चों की संरक्षिका, सैडल माता, बास्योड़ा की देवी, चेचक निवारक माता
  • – वाहन –  गधा 
  • – पुजारी –  कुम्हार 
  • – निर्माण – सवाई माधोसिंह प्रथम 
  • – प्रतीक चिह्न – खेजड़ी 
  • – मेला – चैत्र कृष्ण अष्टमी को चाकसू (जयपुर) तथा कागा क्षेत्र (जोधपुर)
  • – यह एकमात्र ऐसी लोकदेवी है, जिनकी खण्डित मूर्ति की पूजा होती है।

 कैलादेवी

  • – उपनाम- जोगमाया या अंजनी माता।
  • – प्रमुख मंदिर – त्रिकूट पर्वत, कालीसिंध नदी के पास, करौली 
  • – निर्माण –  वर्ष 1900 में गोपालपाल 
  • – कुलदेवी  – यादव वंश 
  • – इस मंदिर में महालक्ष्मी एवं चामुण्डा माता की प्रतिमाएँ स्थित है।
  • – इस मंदिर के सामने हनुमान मंदिर है, जिसे स्थानीय लोग लांगुरिया कहते हैं।
  • – इनकी भक्ति में अलगोजा वाद्ययंत्र के साथ लांगुरिया गीत गाया जाता है।
  • – मेला – चैत्र शुक्ल अष्टमी 
  • – उन्हें भगवान श्रीकृष्ण की बहन या हनुमान जी की माता माना जाता है।
  • – कैलादेवी ‘गुर्जरों व मीणाओं की आराध्य देवी’ हैं।
  • – कैलादेवी मंदिर के सामने ही बोहरा भगत की छतरी है।

सारिका माता

  • – उपनाम – उष्ट्रवाहिनी देवी
  • – कुलदेवी – पुष्करणा ब्राह्मणों की
  • – प्रमुख मंदिर – जोधपुर तथा बीकानेर 
  • – राजस्थान की एकमात्र देवी जो ऊँट पर सवार है।
  • – मधुमेह रोग निवारक देवी निवारक देवी के रूप में पूजा जाता है।

नागणेची माता

  • – प्रमुख मंदिर – नागाणा गाँव, बाड़मेर
  • – कुलदेवी- राठौड़ वंश 
  • – प्रतीक – बाज या चील 
  • – इनको महिषासुरमर्दिनी कहा जाता है।

बाण माता

  • – कुलदेवी- सिसोदिया वंश
  • – मुख्य मंदिर – नागदा गाँव, उदयपुर

सुगाली माता

  • – कुलदेवी – आउवा के चम्पावत ठाकुरों की।
  • – 1857 की क्रांति की देवी।
  • – इनकी मूर्ति में 10 सिर और 54 हाथ है।

चामुण्डा माता

  • – आराध्य देवी – राठौड़ों
  • – कुलदेवी – प्रतिहारों 
  • – दुर्गा माता का सातवाँ अवतार– मेला – चैत्र एवं आश्विन नवरात्र

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अंतिम शब्द :

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