भारत के प्रमुख लोक नृत्य क्लासरूम नोट्स

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क्या आप जानते हैं भारत के प्रमुख लोक नृत्य कौन-कौन से हैं और वह किस राज्य से संबंधित है यहां से काफी ज्यादा चांस होते हैं परीक्षा में प्रश्न पूछे जाने का | इसलिए प्रत्येक विद्यार्थी को भारतीय लोक नृत्य के नाम एवं उनसे संबंधित समस्त जानकारी याद होना बहुत जरूरी है इसलिए हम आपको इस टॉपिक से संबंधित शानदार नोट्स उपलब्ध करवा रहे हैं 

अगर आप भारत के लोक नृत्यों के बारे में नहीं जानते हैं तो हमारी इस पोस्ट को पूरा पढ़े जिसमें हमने सभी लोग नृत्यों के बारे में समस्त जानकारी साझा की है उम्मीद करते हैं यहां से परीक्षा में आपको एक न एक प्रश्न जरूर देखने को मिलेगा

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भारत के प्रमुख लोक नृत्य

– लोक नृत्य एक कला का रूप है।

– यह वह नृत्य है जो विभिन्न वाद्ययंत्रों की मंत्रमुग्ध कर देने वाली धुनों पर लयबद्ध शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से मूल लोगों द्वारा अभिव्यक्त किया जाता है।

– लोक नृत्य जाति व क्षेत्र विशेष से संबंधित है क्योंकि अलग-अलग जातियों द्वारा अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग लोक नृत्य किया जाता है।

1. घूमर नृत्य

– घूमर राजस्थान का एक लोकप्रिय लोक नृत्य है जो राजस्थान का समृद्ध संस्कृति और विरासत को प्रदर्शित करता है।

– घूमर नृत्य तीज, होली, दुर्गापूजा, नवरात्रि तथा गणगौर एवं विभिन्न देवियों की पूजा के अवसर पर किया जाता है।

2.  कालबेलिया नृत्य

– कालबेलिया नृत्य पश्चिम राजस्थान का प्रसिद्ध लोकनृत्य है।

– इस नृत्य को ‘सपेरा डांस’ भी कहा जाता है।

– कालबेलिया नृत्य की प्रसिद्ध नृत्यांगना गुलाबो सपेरा ने इस नृत्य को विश्व भर में पहचान दिलाई।

– इस नृत्य में मुख्य रूप से पुंगी वाद्ययंत्र का प्रयोाग किया जाता है।

3.  गवरी नृत्य

– राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र में किया जाने वाला गवरी नृत्य भील जनजाति का प्रसिद्ध नृत्य है।

– गवरी नृत्य को ‘राई नृत्य’ भी कहा जाता है यह श्रावण-भाद्रपद (अगस्त-सितम्बर) माह में किया जाता है।

– गवरी नृत्य का उद्भव शिव-भस्मासुर की कथा से माना जाता है। 

4.  गरबा नृत्य

– गरबा एक गुजराती लोक नृत्य है जो नवरात्रि में 9 दिनों तक किया जाता है।

– यह नृत्य एक केन्द्र में दीपक जलाकर अथवा देवी शक्ति की प्रतिमा के आसपास किया जाता है।

5.  डांडिया नृत्य

– डांडिया गुजरात का एक लोकनृत्य है इसे डांडिया रास/रास नृत्य के नाम से भी जाना जाता है।

– इस नृत्य में नर्तक दो रेखाओं में आमने-सामने खड़े होते हैं और हाथ में पकड़ी छड़ियाँ आपस में मारते हैं।

6. रउफ नृत्य

– रउफ, जम्मू-कश्मीर का प्रसिद्ध लोकनृत्य है जो रुउफ जनजाति द्वारा किया जाता है।

– इस लोकनृत्य को ‘डमहल’ भी कहा जाता है।

7. भाँगड़ा नृत्य

– भाँगड़ा पंजाब का एक जीवंत लोक संगीत व लोक नृत्य हैं।

– यह नृत्य बैशाखी के समय फसल कटाई पर किया जाता है।

8. रासलीला नृत्य

– रासलीला नृत्य उत्तर प्रदेश के मथुरा व वृंदावन के क्षेत्रों में कृष्ण जन्माष्टमी व होली के त्योहारों पर किया जाता है।

9. चरकुला नृत्य

– चरकुला उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में किया जाने वाला नृत्य है।

– इस नृत्य में महिलाएँ अपने सिर पर बड़े बहु-स्तरीय वृत्ताकार लकड़ी के पिरामिण्डों पर तेल के दीपक रखकर कृष्ण भक्ति गीतों पर नृत्य करती है।  

10.  गिद्दा नृत्य

– गिद्दा पंजाब में महिलाओं द्वारा किया जाने वाला लोकनृत्य है।

– यह सामाजिक अवसरों पर किया जाता है तथा इस नृत्य में लयबद्ध ताली के साथ ढोलकी बजाई जाती है।

11. लावणी नृत्य

– यह महिलाओं द्वारा किया जाने वाला महाराष्ट्र राज्य का प्रमुख लोक नृत्य है।

– इस नृत्य में ढोलकी वाद्ययंत्र बजाया जाता है।

12. लेजिम

– लेजिम भारत के महाराष्ट्र राज्य का एक लोक नृत्य है।

– यह नृत्य गणेश चतुर्थी (भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी) पर पुरुष व महिलाओं द्वारा किया जाता है।

13. थांगटा

– यह मणिपुर का विशिष्ट मार्शल आर्ट नृत्य है जो तलवार व भालों के साथ किया जाता है।

14.  पुंगचोलम नृत्य

– पुंगचोलम नृत्य मणिपुर का प्रसिद्ध नृत्य है यह नृत्य पुरुषों व महिलाओं द्वारा किया जाता है।

15.  बिहू नृत्य

– बिहू नृत्य असम राज्य का एक स्वदेशी लोक नृत्य है। जो बिहू त्योहार से संबंधित है।

– यह नृत्य पुरुष व महिलाओं द्वारा किया जाता है।

– इस नृत्य की मुख्य विशेषता है- “तीव्र कदमों और तीव्र हाथ की चालों के साथ नृत्य”।

16. बागुरुम्बा नृत्य

– बागुरुम्बा नृत्य असम का एक लोकनृत्य है जो कछारी (बोडो) समुदाय के लोग कृषि उत्सव के रूप में मनाते हैं।  

17. होजगिरी नृत्य

– भारतीय राज्य त्रिपुरा में होजगिरी एक रियांग जनजाति का लोक नृत्य है।

– इस नृत्य में मिट्टी के घड़े पर खड़े रहकर सिर पर बोतल और हाथ में मिट्टी का दीपक अथवा थाली को संतुलित कर गीत गाए जाते हैं और शरीर का केवल निचला भाग हिलाया जाता है।

18. कीर्तन

– कीर्तन पश्चिम बंगाल का प्रसिद्ध लोक नृत्य है जो भगवान विष्णु की पूजा से जुड़ा है।

19. लाहो नृत्य

– लाहो नृत्य मेघालय का एक लोक नृत्य है।

– इस नृत्य के समय वाद्यो के बजाय एक पुरुष दोहे सुनाता है।

20. राउत नृत्य

– राउत नृत्य छत्तीसगढ़ के यादवों (राउत) द्वारा दीवाली के बाद कार्तिक शुक्ल एकादशी (प्रबोधनी एकादशी) को किया जाता है।

21. चोलम्बा नृत्य

– चोलम्बा नृत्य हिमाचल प्रदेश का सबसे पुराने ज्ञात नृत्यों में से एक है।

– यह नृत्य बाघ को मारने के बाद शुरू किया जाता है और मरे हुए जानवर की खाल के नाक को सोने के आभूषणों से सजाया जाता है। 

22. डोमकच नृत्य

– डोमकच नृत्य भारत के बिहार व झारखण्ड का लोक नृत्य है।

– यह नृत्य महिलाओं द्वारा शादी उत्सवों में किया जाता है।

23. चेराव नृत्य

– चेराव या छिरऊ मिजोरम का एक सांस्कृतिक नृत्य है इस नृत्य को बाँस नृत्य भी कहा जाता है।

– इस नृत्य में पुरुष बाँस को लयबद्ध तरीके से हिलाते हैं और महिलाएँ बाँस के भीतर बाहर कदम रखती है।

24. कोल्कली परिचकाली

– यह दक्षिणी केरल व लक्षदीप के इलाकों की लोकप्रिय युद्ध कला नृत्य है।

– इस नृत्य  में नर्तक लकड़ी के बने नकली शस्त्रों का प्रयोग करते हुए युद्ध शृंखलाओं का अभिनय करते हैं।

25. कुम्मी नृत्य

– कुम्मी तमिलनाडु का एक लोकप्रिय लोक नृत्य है।

– यह नृत्य महिलाओं द्वारा गोलाकार रूप में खड़ी रहरक बिना संगीत के केवल लयबद्ध ताली बजाकर किया जाता है। 

– यह नृत्य पोंगल के त्योहार पर किया जाता है।

26. कावड़ी अट्टम

– कावड़ी अट्टम नृत्य तमिलनाडु के आदिवासियों द्वारा किया जाता है।

– कावड़ी अट्टम का अर्थ है – ‘बोझ नृत्य’।

– इस नृत्य में युद्ध के देवता भगवान मुरुगन की पूजा की जाती है।

27. भामाकल्पम नृत्य

– आन्ध प्रदेश का भामाकल्पम नृत्य कुचिपुड़ी पर आधारित एक प्रसिद्ध नृत्य नाटिका शैली है।

– यह नृत्य भगवान कृष्ण की ईष्यालु पत्नी सत्यभामा पर आधारित है।

28. देखनी नृत्य

– देखनी एक अर्थ-शास्त्रीय गोवा की नृत्य शैली है। तथा इसी नृत्य को गोवा का सांस्कृतिक खजाना माना जाता है।

– यह नृत्य लड़कियों के एक समूह द्वारा हाथों में मिट्टी के तेल के दीपक लेकर किया जाता है।

29. फुगड़ी नृत्य

– फुगड़ी गोवा का एक लोक नृत्य है।

– यह नृत्य कोंकण क्षेत्र में महिलाओं द्वारा विभिन्न धार्मिक और सामाजिक अवसरों पर किया जाता है।

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अंतिम शब्द

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